Sunday, 22 March 2026

‘TASEER’

Pakshala

Date - 20th March, 2026'

Day - Friday

Pakshala


Today was truly a humbling and inspiring experience.

I had the honour of being invited by Tatsat Foundation in association with National Association for the Blind, RK Puram, New Delhi, to conduct a Master Class at Café Beyond Eyes, R.K. Puram — a place where every dish is crafted by incredibly talented girls’ and boys’ chefs who are visually impaired. Teaching them felt less like a class session and more like a beautiful exchange of energy, learning, and respect.

To my wonderful new students — thank you for welcoming me with such warmth and spirit. You have inspired me far more than I could ever teach.

Grateful for this unforgettable experience. ❤️

My First topic 

तासीर (Taseer) – भोजन का स्वभाव और प्रभाव !!

तासीर एक उर्दू शब्द है, जिसका अर्थ होता है किसी वस्तु का गुण या स्वभाव
आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में तासीर का मतलब हैभोजन का वह प्रभाव जो पाचन के बाद हमारे शरीर की आंतरिक गर्मी (body temperature) और ऊर्जा प्रवाह पर पड़ता है।

तासीर को समझना हमें यह जानने में मदद करता है किहमें अपनी प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार क्या खाना चाहिए, मौसम के अनुसार आहार कैसे संतुलित करें, और अपनी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार भोजन का चयन कैसे करें !!!

तासीर के मुख्य प्रकार

1. गरम तासीर (Heating Foods)

गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थ शरीर में ऊष्मा, रक्त संचार और पाचन शक्ति (अग्नि) को बढ़ाते हैं, इनका सेवन विशेष रूप से सर्दियों या प्रसव के बाद लाभकारी माना जाता है।

उदाहरण:

सूखे मेवे: बादाम, काजू, खजूर, अखरोट

मसाले: अदरक, लहसुन, काली मिर्च, दालचीनी, हल्दी, लौंग

बीज: तिल, मेथी, अलसी

प्रोटीन: चिकन, मछली, बकरी का मांस, अंडा

अन्य: शहद, गुड़, गाजर, मूली

अधिक सेवन से: एसिडिटी, मुँह के छाले, त्वचा पर रैश, चिड़चिड़ापन हो सकता है

2. ठंडी तासीर (Cooling Foods)

ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थ शरीर को शांत और ठंडा रखते हैं तथा अतिरिक्त गर्मी को कम करते हैं। ये विशेष रूप से गर्मियों और गर्भावस्था में उपयोगी होते हैं।

उदाहरण:

रसीले फल: तरबूज, खरबूजा, अंगूर, अनार, नारियल पानी

सब्जियाँ: खीरा, लौकी, पालक, पुदीना

डेयरी: दही, छाछ, दूध

अनाज/दाल: मूंग दाल, चावल, जौ, ओट्स

जड़ी-बूटियाँ: सौंफ, धनिया, गुलाब जल, सब्जा बीज

अधिक सेवन से: खांसी, बलगम, जोड़ों में जकड़न जैसी समस्याएँ हो सकती हैं

 

तासीर और शरीर का संतुलन

जो चीज़ें पित्त बढ़ाती हैं उन्हें गरम तासीर कहा जाता है

जो चीज़ें कफ बढ़ाती हैं उन्हें ठंडी तासीर कहा जाता है

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि वात, पित्त और कफ संतुलित रहें, इसलिए आहार हमेशा संतुलित होना चाहिए—“सब कुछ थोड़ा-थोड़ा


मौसम और तासीर का संबंध

सर्दियों में: गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थ लाभकारी

गर्मियों में: ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थ जरूरी

उदाहरण:

सर्दियों में बादाम, शहद, अदरक शरीर को गर्म रखते हैं !!

गर्मियों में दही, शरबत, तरबूज शरीर को ठंडा रखते हैं !!

इसी कारण:

रात में दही खाने से मना किया जाता है

दिन में दही खाना बेहतर माना जाता है

महत्वपूर्ण समझ

हर खाद्य पदार्थ की तासीर होती है, लेकिन उसकी तीव्रता (degree) अलग होती है:

गेहूं की तासीर गरम है, फिर भी गर्मियों में खाया जा सकता है

दूध की तासीर ठंडी है, फिर भी सर्दियों में लाभकारी है !!

यानी तासीर हमेशा अत्यधिक प्रभावी नहीं होतीसंतुलन सबसे महत्वपूर्ण है


Hot & Cold Food का सांस्कृतिक दृष्टिकोण

भोजन केवल पोषण नहीं, बल्कि आनंद और अनुभव भी है जिसमें स्वाद, सुगंध, रूप और संतुष्टि के साथ-साथ स्वास्थ्य भी शामिल है।दुनिया की लगभग हर संस्कृति में भोजन को गरम और ठंडा के रूप में वर्गीकृत किया जाता है: पश्चिमी समाज में यह अंतर अक्सर male/female energy के रूप में दिखता है हिंदू परंपरा में शुद्ध और अशुद्ध के रूप में

खानपान का उदाहरण

दही को ठंडी तासीर माना जाता है—even अगर वह गरम परोसी जाए !!

अदरक को गरम माना जाता है—even अगर वह आइसक्रीम में हो !!

यानी तासीर स्वाद या तापमान नहीं, बल्कि आंतरिक प्रभाव से तय होती है !!

 

फूड कॉम्बिनेशन (Food Pairing)

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि: भोजन का चयन व्यक्ति, मौसम और परिस्थिति के अनुसार हो, सही संयोजन किया जाए

अच्छे संयोजन:

आम + मलाई

इमली + गुड़

लाल मिर्च + घी

हानिकारक संयोजन (लोक मान्यता):

मछली + दूध

 

रीजनल उदाहरण: कश्मीरी खाने में सौंफ

कश्मीरी व्यंजनों में सौंफ का उपयोग केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि संतुलन के लिए होता है:

1. मौसम के अनुसार संतुलन

कश्मीर ठंडा क्षेत्र है, जहाँ भोजन भारी होता है (मटन, दही, घी

सौंफ इन भारी तत्वों को संतुलित करती है

2. पाचन में सहायता

पाचन सुधारती है, भारीपन कम करती है !!

3. फ्लेवर प्रोफाइल

हल्की मिठास और खुशबू देती है, तीखेपन को संतुलित करती है

4. पारंपरिक कुकिंग

कश्मीरी पंडित भोजन में प्याज-लहसुन नहीं होता

इसलिए सौंफ + सौंठ मुख्य फ्लेवर बेस बनते हैं !!

 

निष्कर्ष (Conclusion)

स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है:

गरम और ठंडी तासीर का सही संतुलन

कोई भी भोजन पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं होता

सही मात्रा,सही समय और सही संयोजन ही स्वास्थ्य का आधार है !!

 


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